https://www.youtube.com/@joeyfunny9098हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट 17वें दिन का सस्पेंस और अमेरिका की ‘गुंडागर्दी’मध्य-पूर्व की राजनीति एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सुर्खियों में है। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को अब 17 दिन से अधिक हो चुके हैं और इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र बन गया है Strait of Hormuz यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य। यह दुनिया का वह समुद्री मार्ग है जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या अमेरिका अब भी दुनिया का “ग्लोबल पुलिसमैन” है, या उसका
प्रभाव कम हो रहा है?अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का हालिया बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने North Atlantic Treaty Organization (NATO) देशों से खुलकर समर्थन मांगा और चेतावनी भी दी कि अगर सहयोग नहीं मिला तो “अंजाम अच्छे नहीं होंगे।” आलोचक इसे कूटनीति नहीं बल्कि दबाव की राजनीति या “गुंडागर्दी” कह रहे हैं।सवाल उठ रहा है—क्या अमेरिका खुद बनाई गई इस रणनीतिक उलझन में अब अकेला पड़ता जा रहा है?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।इसकी रणनीतिक अहमियतदुनिया के लगभग 20% तेल निर्यात इसी रास्ते से गुजरते हैंखाड़ी देशों का मुख्य ऊर्जा मार्गवैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करने की क्षमताअमेरिका, यूरोप और एशिया की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दायही कारण है कि जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
ईरान की ‘डांसिंग मिसाइल’: Sejil का बढ़ता खौफ
इस संकट में ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का एक बड़ा संकेत दिया है—Sejil missile।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह ईरान की सबसे खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है। कई विश्लेषक इसे तकनीकी रूप से भारत-रूस की प्रसिद्ध BrahMos missile से तुलना करते हैं, हालांकि दोनों की तकनीक अलग है।
Sejil मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं
1. लंबी मारक क्षमता
इसकी रेंज लगभग 2000 से 2500 किलोमीटर तक मानी जाती है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को निशाना बनाया जा सकता है।
2. दिशा बदलने की क्षमता
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लक्ष्य के पास पहुंचने से पहले हवा में दिशा बदल सकती है। इसी वजह से इसे अनौपचारिक रूप से “डांसिंग मिसाइल” कहा जाता है।
3. डिफेंस सिस्टम को चकमा
ऐसे मूवमेंट के कारण आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जैसे Iron Dome, के लिए इसे रोकना मुश्किल हो सकता है।
4. सॉलिड फ्यूल तकनीक
यह ठोस ईंधन पर आधारित है, इसलिए इसे बहुत कम तैयारी समय में लॉन्च किया जा सकता है।
इसी कारण हॉर्मुज क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना और सहयोगी देशों के जहाजों पर संभावित खतरे की चर्चा बढ़ गई है।

NATO का इनकार: जब दोस्तों ने ही दिखाया आईना
अमेरिका की उम्मीद थी कि North Atlantic Treaty Organization के सदस्य देश तुरंत उसके साथ खड़े होंगे। लेकिन स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।कई सहयोगी देशों ने इस अभियान में शामिल होने से दूरी बना ली है।इसके पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं1. Article 5 का विवादNATO का सबसे महत्वपूर्ण नियम कहता है कि यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है तो उसे सभी पर हमला माना जाएगा।लेकिन इस मामले में अमेरिका खुद यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि उस पर सीधा हमला हुआ है या
भारत और चीन की कूटनीतिक जीतनहीं। इसलिए अन्य सदस्य देश सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से बच रहे हैं।2. ट्रंप की विदेश नीति पर संदेहकई यूरोपीय विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की “America First” नीति ने पहले ही गठबंधनों को कमजोर किया है। पुराने विवाद, जैसे ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क से तनाव या अन्य आर्थिक विवाद, भी इस दूरी का कारण बने हैं।जिन देशों ने दूरी बनाईUnited KingdomAustraliaJapanइन देशों का तर्क साफ है—जिस संघर्ष की शुरुआत अमेरिका ने की, उसमें सीधे कूदना उनके हित में नहीं है।
भारत और चीन की कूटनीतिक जीत
इस पूरे संकट में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कुछ देश बिना युद्ध में उतरे भी लाभ की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।विशेष रूप से India और China की कूटनीति चर्चा में है।रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने इन दोनों देशों के व्यापारिक जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है।भारत की ‘बैलेंसिंग डिप्लोमेसी’भारत ने एक तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक
संबंध बनाए रखे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी https://pgtnews24.com/हॉर्मुज-जलडमरूमध्य-संट/संवाद कायम रखा है।यह संतुलित नीति भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मामले में फायदा पहुंचा सकती है।संभावित “सीक्रेट डील” की चर्चाकुछ पश्चिमी विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत और ईरान के बीच ऊर्जा और व्यापार को लेकर विशेष समझौते हो सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप की ‘चाइना स्ट्रेटेजी’ या कूटनीतिक निराशा?
तनाव बढ़ने के बीच Donald Trump ने एक और बयान दिया जिसने बहस छेड़ दी।उन्होंने कहा कि वह China की यात्रा तभी करेंगे जब चीन हॉर्मुज क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजकर समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने में मदद करेगा।कई विशेषज्ञों ने इस बयान को कूटनीतिक दबाव की रणनीति माना है, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह अमेरिका के बढ़ते कूटनीतिक अलगाव को दिखाता है।चीन के लिए यह प्रस्ताव ज्यादा आकर्षक नहीं माना जा रहा क्योंकि उसे पहले से ही सुरक्षित समुद्री मार्ग मिल रहा है।

क्या बदल रहा है वैश्विक शक्ति संतुलन?
हॉर्मुज संकट ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या दुनिया का शक्ति संतुलन बदल रहा है?कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना “मल्टी-पोलर वर्ल्ड” की ओर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सिस्टम का संकेत है।जहां पहले अमेरिका की अगुवाई में निर्णय होते थे, अब कई क्षेत्रीय शक्तियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
क्या खत्म हो रहा है अमेरिकी वर्चस्व?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट केवल एक सैन्य टकराव नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों का प्रतीक भी है।एक तरफ अमेरिका अपने सहयोगियों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है, जबकि दूसरी ओर कई देश अधिक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने लगे हैं।India जैसे देशों ने दिखाया है कि कूटनीति और संतुलित रणनीति के जरिए भी राष्ट्रीय हित सुरक्षित किए जा सकते हैं।भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह संकट वास्तव में वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलता है या फिर यह केवल अस्थायी भू-राजनीतिक तनाव साबित होगा।