हार का असली सच: भारत vs दक्षिण अफ्रीका मैच के वे 5 चौंकाने वाले खुलासे

भारत vs दक्षिण अफ्रीका मैच

भारत vs दक्षिण अफ्रीका मैच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली करारी हार ने न केवल करोड़ों भारतीय फैंस का दिल तोड़ा है, बल्कि टीम के रणनीतिक खोखलेपन को भी उजागर कर दिया है। एक वरिष्ठ खेल विश्लेषक के तौर पर मैं यह साफ देख पा रहा हूं कि टीम इंडिया यह मैच मैदान पर नहीं, बल्कि टॉस से पहले ही ड्रेसिंग रूम में हार चुकी थी। नरेंद्र मोदी स्टेडियम के उस अजीबोगरीब

‘जीत-हार’ के चक्र (Win-Loss-Win-Loss) ने एक बार फिर अपना रंग दिखाया, लेकिन हार की असली वजह कोई कुदरत का निजाम नहीं, बल्कि ‘गल्ली क्रिकेट’ के स्तर के फैसले थे।आइए उन 5 कड़वे सच का विश्लेषण करते हैं जो इस हार के पीछे छिपे हैं।

उप-कप्तान की बलि: अनुभव पर ‘एक्सपेरिमेंट’ की मार

उप-कप्तान की बलि: अनुभव पर ‘एक्सपेरिमेंट’ की मारमैच का सबसे आत्मघाती फैसला था टीम के उप-कप्तान अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना। एक ऐसा खिलाड़ी जिसके पास 10 साल का लंबा अनुभव है, जो आईपीएल में कप्तानी कर चुका है और जिसने टी20 वर्ल्ड कप में संकट के समय विराट कोहली के साथ मैच जिताऊ साझेदारी की थी, उसे बेंच पर बैठा देना समझ से

परे है। उनकी जगह वाशिंगटन सुंदर को लाया गया, जो पूरे मैच में बेअसर दिखे। हद तो तब हो गई जब सुंदर बिना किसी ठोस प्रदर्शन के डेविड मिलर जैसे दिग्गज से मैदान पर भिड़ते (Sledging) नजर आए। यदि आज अक्षर होते, तो वह न केवल अपनी फिरकी से मिलर को फंसा सकते थे, बल्कि बल्लेबाजी में भी गहराई प्रदान करते।”उप-कप्तान तब बनाया जाता है जब आपकी परफॉर्मेंस और आपकी मैच की एनालिसिस काफी अच्छी हो… आज अक्षर पटेल होता तो मैच का कुछ रुख और अंदाज अलग होता।”

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रिमोट कंट्रोल’ कप्तानी और गंभीर का बढ़ता हस्तक्षेप

रिमोट कंट्रोल’ कप्तानी और गंभीर का बढ़ता हस्तक्षेपमैदान पर कप्तान अब केवल एक चेहरा बनकर रह गया है, जिसे शायद सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। असली ‘रिमोट कंट्रोल’ तो ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर के हाथों में है। खिलाड़ियों की अपनी सहज क्षमता (Natural Ability) का गला घोंटा जा रहा है। मैच के दौरान निर्देश देने के लिए जिस तरह का ‘मैसेज तंत्र’

विकसित किया गया है, वह हास्यास्पद है। मोहम्मद सिराज का बीच मैदान में जाकर शिवम दुबे के जूते के फीते बांधने का नाटक करना और ड्रेसिंग रूम के निर्देश पहुंचाना यह दर्शाता है कि खिलाड़ियों को खुद के फैसले लेने की आजादी ही नहीं है। जब कोच का नियंत्रण इतना ज्यादा हो जाए, तो टीम का प्रदर्शन बिखरना तय है।

अर्शदीप सिंह: जसप्रीत बुमराह से भी तेज ‘बुलेट ट्रेन’

इस शर्मनाक हार के अंधेरे में अर्शदीप सिंह की गेंदबाजी एक चमकती हुई रोशनी की तरह है। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि अर्शदीप अब बुमराह के वर्चस्व को चुनौती दे रहे हैं।• जसप्रीत बुमराह: 22 पारियों में 33 विकेट (एक शानदार ‘ट्रेन’ की रफ्तार)।• अर्शदीप सिंह: मात्र 18 पारियों में 32 विकेट (एक ‘बुलेट ट्रेन’ की रफ्तार)। अर्शदीप जिस गति से विकेट चटका रहे हैं, वह बुमराह को बहुत जल्द पीछे छोड़ देंगे। 24 गेंदों में मात्र 15 रन देकर 3 विकेट लेने वाले बुमराह की तारीफ तो बनती है, लेकिन भविष्य अब अर्शदीप के हाथों में सुरक्षित नजर आता है।

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फील्डिंग का गिरता स्तर: पाकिस्तान से भी बदतर आंकड़े

फील्डिंग का गिरता स्तर: पाकिस्तान से भी बदतर आंकड़ेक्रिकेट का बुनियादी मंत्र है ‘कैच पकड़ो, मैच पकड़ो’, लेकिन भारतीय टीम इसे पूरी तरह भूल चुकी है। इस टी20 वर्ल्ड कप में भारत का कैच छोड़ने का रिकॉर्ड शर्मनाक है। आंकड़े देखिए और खुद तय कीजिए:• भारत: 9 कैच छोड़े (सिर्फ नामीबिया जैसी टीम से बेहतर)।• पाकिस्तान: केवल 5 कैच छोड़े। जब विपक्षी टीम का खिलाड़ी (कोरविन बॉश) अभिषेक शर्मा का नामुमकिन सा दिखने वाला कैच पकड़कर मैच पलट देता है, तब हमारे खिलाड़ी (जैसे सूर्यकुमार यादव) आसान मौके भी गंवा रहे हैं। यह अंतर ही जीत और हार को तय करता है।

मध्यक्रम का बिखराव और साझेदारी का अभाव

मध्यक्रम का बिखराव और साझेदारी का अभावदक्षिण अफ्रीका और भारत की स्थिति एक समय एक जैसी थी, लेकिन अंतर था साझेदारी का। जहां एक तरफ डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने शुरुआती झटकों के बाद टिककर मैच निकाला, वहीं भारतीय टीम का मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया। टीम में ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज तेज खेलने का

साहस नहीं दिखा पा रहा है। हार्दिक पांड्या जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी दबाव में ‘टुक-टुक’ बल्लेबाजी करने पर मजबूर दिखे। बिना किसी बड़ी साझेदारी के आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच जीतने की उम्मीद नहीं कर सकते।

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उप-कप्तान की बलि: अक्षर पटेल को बाहर रखना भारी पड़ा

-कप्तान की बलि: अक्षर पटेल को बाहर रखना भारी पड़ाटीम मैनेजमेंट का सबसे बड़ा फैसला था उप-कप्तान Axar Patel को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना। 10 साल का अनुभव, आईपीएल कप्तानी और बड़े टूर्नामेंट का दबाव झेलने वाला खिलाड़ी बेंच पर बैठा रहा।उनकी जगह Washington Sundar को मौका दिया गया, लेकिन वह मैच में प्रभाव नहीं छोड़ सके। अगर अक्षर टीम में होते, तो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी गहराई मिल सकती थी।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह प्रदर्शन किसी अंतरराष्ट्रीय टीम जैसा नहीं, बल्कि ‘गल्ली क्रिकेट’ जैसा शौकिया था। यदि उप-कप्तान को बाहर रखने, ड्रेसिंग रूम से अत्यधिक दखलंदाजी और खराब फील्डिंग जैसे बुनियादी मुद्दों को तुरंत नहीं सुधारा गया, तो फाइनल का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा। टीम मैनेजमेंट को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है।क्या आपको लगता है कि इस ‘रिमोट कंट्रोल’ कप्तानी और रणनीतिक चूक के साथ टीम इंडिया सेमीफाइनल की बाधा पार कर पाएगी? अपनी बेबाक राय कमेंट्स में जरूर दें।

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